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पराक्रम दिवस: टीम वेकोलि ने दी नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरांजलि, किया रक्तदान

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन 'पराक्रम दिवस' पर उन्हें आदरांजलि अर्पित की गई

PSU Watch Bureau

नागपुर: वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन 'पराक्रम दिवस' पर उन्हें आदरांजलि अर्पित की गई.

मुख्यालय में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि निदेशक (तकनीकी) अजित कुमार चौधरी, निदेशक (वित्त) आर. पी. शुक्ला तथा संचालन समिति सदस्य सुनील मिश्रा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के छाया चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें आदरांजलि अर्पित की.

इस अवसर पर उपस्थित सभी विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नमन किया. कार्यक्रम का संचालन एसपी सिंह, सलाहकार (जनसंपर्क) ने किया. कार्यक्रम के बाद कोल क्लब में वेकोलि और लाइफ लाइन ब्लड बैंक के सयुंक्त तत्वावधान में आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में टीम वेकोलि के सदस्यों ने रक्तदान किया.

पराक्रम दिवस

पराक्रम दिवस 23 जनवरी को भारत में मनाया जाता है. मोदी सरकार ने 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयन्ती से पहले इस दिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी.

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था. जानकीनाथ कटक के मशहूर जानकीनाथ कटक के मशहूर वकील थे. प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थीं, जिसमें 6 बेटियां और 8 बेटे थे. सुभाष उनकी नौवीं संतान और पांचवे बेटे थे. कटक में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने रेवेनशा कॉलिजियेट स्कूल में दाखिला लिया. जिसके बाद उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. 

1919 में बीए की परीक्षा उन्होंने प्रथम श्रेणी से पास की, यूनिवर्सिटी में उन्हें दूसरा स्थान मिला था. सुभाष पिता की इच्छा थी कि वोआईसीएस बनें. पिता की इच्छा पर 1920 में वो आईसीएस तो बने लेकिन अंग्रेजों के अधीन काम करने का मन ना होने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया. उसके बाद सुभाष सामाजिक कार्यों और आज़ादी के आंदोलन से जुड़ गए.

18 अगस्त 1945 को वे हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे. इस सफर के दौरान ताइहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई. उनकी मौत इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है.

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